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Mutual Funds Vs Fixed Deposit in Hindi

Mutual Fund Vs fixed Deposit

Mutual Funds Vs Fixed Deposit

म्यूच्यूअल फंड Vs  फिक्स डिपाजिट, इन दोनों में से आप लोगों के लिए कौन सा बेस्ट इन्वेस्टमेंट ऑप्शन है?  अगर आपने इन्वेस्टर हैं तो यह बहुत जरूरी प्रश्न होता है कि हम कहां पर अपना निवेश स्टार्ट करें। अगर हमारे पास पैसे हैं तो हमें यह जानना जरूरी है कि हमारे लिए म्यूच्यूअल फण्ड और फिक्स डिपाजिट में से कौन सा बेहतर रिटर्न हो सकता है? हम लोग इस आर्टिकल में आगे जानेंगे कि आप लोगों को किस तरह का रिटर्न मिलेगा म्यूच्यूअल फंड और फिक्स्ड डिपाजिट से? अगर आप लोगों को बीच में कभी पैसे की जरूरत पड़ती है और आप लोगों को पैसा निकालना है तो आप लोगों के लिए कौन सा बेहतर ऑप्शन होगा या फिर? आजकल का सबसे बड़ा, यह प्रश्न होता है कि टैक्स क्या लगेगा अगर हम कोई भी निवेश करते हैं? तो हम लोग यह भी जानेंगे म्यूच्यूअल फंड VS फिक्स डिपॉजिट में टैक्स किस तरह से लगता है? म्यूच्यूअल फंड टैक्स और डिपाजिट टैक्स साथी हम लोग यह भी जानेंगे कि म्युचुअल फंड ऑफिस डिपॉजिट में निवेश करते हैं तो  किस तरह का जोखिम हो सकता है ?अगर आप लोग किसी भी टॉपिक पर डायरेक्ट जाना चाहते हैं तो टेबल ऑफ कंटेंट पर क्लिक करके आप लोग उस पर डायरेक्ट जा सकते हैं।

Table of Contents

 म्यूच्यूअल फंड क्या है?

 म्यूच्यूअल फंड एक तरह का इनडायरेक्ट निवेश है शेयर मार्केट में। इनडायरेक्ट निवेश से मतलब है कि अगर आप लोगों के पास शेयर बाजार की ज्यादा जानकारी नहीं है। तो आप लोगों को यूज़फुल फंड निवेश करने में मदद करता है एक फंड मैनेजर के माध्यम से। अब यह फंड मैनेजर किसी ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी की तरफ से होता है जो उस फंड को मैनेज कर रहा होता है। उस फंड को मैनेज कर रहा होता है का मतलब है कि जो भी उस फंड में पैसे लगा रहे होंगे आप वह आप लोगों का पैसा लेकर के अलग-अलग जगहों पर निवेश कर रहा है। यानी कि वह अलग-अलग स्टॉप में निवेश कर रहा है। म्यूच्यूअल फंड केवल स्टॉक मार्केट  तक ही सीमित नहीं है। म्यूच्यूअल फंड मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट में भी आप लोगों का पैसा लगाता है। जैसे की कंपनी की एलसीडी, बैंकों की फिक्स डिपाजिट, या फिर इसी तरह की और सुरक्षित जगह जहां पर आप लोगों के पैसे पर गारंटी रिटर्न मिल सके। हम लोग आगे कंपेयर करेंगे इनका तो आप लोग डायरेक्ट टेबल ऑफ कंटेंट से उस टॉपिक्स पर जा सकते हैं अगर आप लोगों को फिक्स डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड के बारे में पता है।

 फिक्स डिपॉजिट क्या है?

 फिक्स डिपाजिट, बैंक, पोस्ट ऑफिस, नॉन बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनीज, और कॉरपोरेट सेक्टर की कंपनी इत्यादि की तरफ से लोगों को निवेश करने का मौका देती है। फिक्स डिपॉजिट पर जो भी आप लोगों को ब्याज मिलता है वह बिल्कुल फिक्स होता है। जैसे कि अगर आप लोगों ने किसी कंपनी में निवेश किया या फिर किसी बैंक या फिर पोस्ट ऑफिस में निवेश किया है फिक्स डिपॉजिट में। तो उस फिक्स डिपॉजिट पर जो भी ब्याज आप लोगों को निवेश करते समय बताया गया है कंपनी की तरफ से। वही ब्याज आप लोगों को मिलता रहेगा जब तक आप लोगों का फिक्स डिपाजिट  परिपक्व ना हो जाए। इस बीच अगर कंपनी किसी भी तरह का ब्याज में बदलाव करती है तो उससे आप लोगों के फिक्स डिपॉजिट पर किसी भी तरह का प्रभाव नहीं पड़ेगा। मुझे आशा है कि यहां से आप लोग थोड़ा-थोड़ा समझ रहे हैं कि हमें अपना निवेश कहां करना चाहिए? पर रखिए अभी डिसीजन मत लीजिए आगे की कुछ और इंपॉर्टेंट टॉपिक हैं जो कि आप लोगों को देखना चाहिए। अगर आप लोग इन दोनों निवेश में से अपने लिए बेहतर निवेश ऑप्शन ढूंढ रहे हैं। यानी कि फिक्स डिपाजिट vs म्यूच्यूअल फंड्स।

  Return (Mutual Fund Vs Fixed Deposit)

अगर आप लोग कहीं भी निवेश कर रहे हैं, तो आप लोगों को यह पता होना चाहिए कि रिटर्न किस तरह का मिल सकता है उस निवेश से। तो इस सेक्शन में आप लोग यही देखेंगे कि फिक्स डिपाजिट Vs  म्यूच्यूअल फंड में कहां पर अच्छा रिटर्न निकल सकता है। इसमें हम लोग शॉर्ट टर्म, मीडियम टॉम और लॉन्ग टर्म में देखेंगे उदाहरण के साथ में।

  Mutual Fund Return

म्यूच्यूअल फंड का निवेश आप लोगों के ऊपर आधारित है। आप लोग किस तरह का निवेश चुनते हैं, म्यूचुअल फंड में? किस तरह का निवेश से मतलब है, कि आप लोग अपना निवेश प्योर इक्विटी में करना चाहते  हैं? जैसा कि मैंने आप लोगों को ऊपर म्युचुअल फंड के बारे में बताया कि म्यूचुअल फंड केवल शेयर बाजार तक ही सीमित नहीं है। यह आप लोगों का पैसा ऐसी जगह पर भी निवेश करता है जहां से आप लोगों को फिक्स और गारंटी रिटर्न निकल पाए। तो अब मैं आपसे पूछता हूं, कि आप लोग किस तरह का निवेश करना चाहते हैं? यह आप लोग मुझे नीचे कमेंट बॉक्स में बता सकते हैं।

 अगर आप चाहते हैं कि आप लोगों का निवेश पूरी तरीके से इक्विटी में हो यानी कि शेयर बाजार में हो। तो आप लोग म्यूच्यूअल फंड से ज्यादा रिटर्न की उम्मीद लगा सकते हैं। ज्यादा रिटर्न से मतलब है कि आप लोग 15 प्रतिशत प्लस का रिटर्न कमा सकते हैं। यह बातें मैं हवा में नहीं कह रहा हूं यह बातें पिछले निवेश से सिद्ध हो चुकी हैं। कि अगर आप लोगों का निवेश प्योर इक्विटी में होता है तो आप लोग  12% से लेकर 15% से ज्यादा का रिटर्न कमा सकते हैं। टूर इक्विटी इन्वेस्टमेंट के साथ-साथ अगर आप लोग अपनी निवेश को ज्यादा समय देते हैं। तो यह रिटर्न और भी ज्यादा हो सकता है। कुछ पढ़ने तो पिछले 5 सालों में 20% से ज्यादा का रिटर्न दिया है। यहां नीचे में आप लोगों को शॉर्ट, मीडियम और लॉन्ग टर्म में कुछ निवेश पर रिटर्न दिखा देता हूं। जिससे आप लोगों को यह अंदाजा हो सके कि म्यूचुअल फंड से किस  तरह के रिटर्न की उम्मीद की जा सकती है?

शॉर्ट टर्म में म्युचुअल फंड से कितना रिटर्न मिलता है?

 सबसे पहले तो आप यह जानिए कि म्यूचुअल फंड में शॉर्ट टर्म होता कितना  है? म्यूचुअल फंड में अगर शॉर्ट टर्म की बात करते हैं तो यह 7 दिनों से लेकर के 1 सालों तक का निवेश होता है। यानी कि जो आप लोगों के निवेश पर मैं  मैच्योरटी 7 दिनों से लेकर के 1 साल के बीच में आ रही हो।

 म्यूचुअल फंड में निवेश को की सुविधा के लिए इस तरह के निवेश की अलग से कैटेगरी बनाकर रखी गई है। यानी कि अगर आप लोगों का लक्ष्य 7 दिनों से लेकर के 1 सालों के बीच के निवेश का है। तो यह कैटेगरी आप लोगों को मदद करती है कि आप लोगों को इन्हीं म्यूच्यूअल फंड्स में निवेश करना चाहिए।  ऐसा इसलिए है क्योंकि म्यूच्यूअल फंड डायरेक्ट मार्केट से लिंग होता है। इसलिए हमारे निवेश पर जोखिम भी होता है। क्योंकि शेयर बाजार में प्रतिदिन शेरों की प्राइस ऊपर नीचे होती रहती है। इसलिए म्यूचुअल फंड में शॉर्ट टर्म म्यूचल फंड की कैटेगरी भी रखी गई है। क्योंकि शेयर बाजार में प्रतिदिन  शेयरों की कीमत ऊपर नीचे होती है। इसलिए इस तरह की कैटेगरी के निवेश में उन्हीं निवेश को शामिल किया जाता है जहां पर आपको फिक्स और गारंटी रिटर्न मिल पाए। लेकिन ऐसा नहीं है कि केवल सिक्स और गारंटी रिटर्न के ऑप्शन में ही निवेश किया जाए। इस तरह के म्यूच्यूअल फंड्स में यानी कि शॉर्ट टर्म म्युचुअल फंड्स में आप लोगों का निवेश इक्विटी में भी किया जाता है। जिससे कि आप लोगों को शॉर्ट टर्म में भी एक अच्छा रिटर्न निकल कर के आ सके। नीचे मैंने कुछ शॉर्ट टर्म म्युचुअल फंड के रिटर्न को दिखाएं हैं जो कि पिछले 1 साल के हैं।

 एचडीएफसी कॉरपोरेट बॉन्ड फंड जिसने पिछले 1 सालों में  7% का रिटर्न अपने निवेशकों को दिया है। दूसरा फंड है रिलायंस प्राइम डेट फंड जिसने अपनी निवेशकों को पिछले 1 साल में 7.33% का रिटर्न दिया है। और तीसरा फंड है आदित्य बिरला सन लाइफ कॉरपोरेट बॉन्ड फंड जिसने अपने निवेशकों को पिछले 1 साल में 7.55% का रिटर्न दिया है।

 जैसा की आप लोगों ने देखा अगर आप शॉर्ट टर्म में निवेश करते हैं तो आप लोगों की निवेश को सुरक्षित जगहों पर किया जाता है। जहां से आप लोगों को फिक्स रिटर्न मिल सके और साथ ही आप लोगों का निवेश इक्विटी में भी किया जाता है।

 मीडियम टॉप म्युचुअल फंड से कितना रिटर्न मिलता है?

 मीडियम टर्म म्यूचुअल फंड में या फिर किसी भी निवेश में मीडियम टॉम 1 साल से ज्यादा और 5 साल से कम के निवेश को मीडियम टॉम निवेश माना जाता है। क्योंकि यह निवेश हमारी आने वाली कुछ सालों की जरूरतों को पूरा करने के लिए होता है। अगर आप म्यूचुअल फंड में आते हैं मीडियम टर्म निवेश के साथ तो आप लोगों को प्योर इक्विटी या फिर इक्विटी और डेट का मिक्स म्यूच्यूअल फंड चुनना चाहिए। यह आप लोगों के ऊपर डिपेंड करता है कि आप लोग अपने निवेश पर कितना रिस्क लेना चाहते हैं और कितना रिटर्न लेना चाहते हैं? नीचे मैंने  कुछ म्यूचुअल फंड के, पिछले 3 सालों के रिटर्न को बताया है जिसको देखकर आप लोग अंदाजा लगा सकते हैं। कि म्यूचुअल फंड से शॉर्ट में कितने रिटर्न की उम्मीद की जा सकती है?

एलएनटी मिडकैप म्यूचुअल फंड। यह म्यूचुअल फंड मिड कैप की कंपनीज में निवेश करता है। यह एलएनटी म्यूच्यूअल फंड कंपनी की तरफ से लांच किया गया है और इस फंड ने पिछले 3 सालों में 18.26% का रिटर्न अपने निवेशकों को दिया है। दूसरा फंड है, कोटक इमर्जिंग इक्विटी स्कीम। यह म्युचुअल फंड कोटक ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी की तरफ से लांच किया गया है। और इसने पिछले 3 सालों में 15.34% का रिटर्न अपने निवेशकों को निकाल कर दिया है। तीसरा फंड में आप लोगों को बताना चाहूंगा, आदित्य बिरला सन लाइफ प्योर वैल्यू फंड। यह फंड आदित्य बिरला ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी की तरफ से लांच किया गया है। इस फंडे पिछले 3 सालों में 17.60% का रिटर्न अपने निवेशकों को निकाल कर दिया है।

 जैसा कि आप लोग देख रहे हैं कि म्यूचुअल फंड ने इसलिए 3 सालों में 12% से ज्यादा का रिटर्न दिया है। लेकिन यह जरूरी नहीं है कि सारे फंड जो 3 साल या फिर 4 साल के लिए चुने जाएं निवेश के लिए। वह सारे इस तरह के रिंगटोन निकाल कर अपने निवेश को दे।  अगर आप और अधिक जानकारी म्यूचल फंड के बारे में लेना चाहते हैं तो आप नीचे दी गई वीडियो को जरूर देखें फुलस्टॉप या फिर आप हमारे यूट्यूब चैनल पर भी जा कर के और भी बहुत सारी जानकारियां ले सकते हैं म्यूचुअल फंड निवेश के बारे में।

 लॉन्ग टर्म में म्यूचुअल फंड से किस तरह का रिटर्न  देते है?

 लॉन्ग टर्म का निवेश अगर आप म्यूचल फंड में कर रहे हैं या फिर किसी और इन्वेस्टमेंट के ऑप्शन में कर रहे हैं। तो अगर हम लोग निवेश  के नियम के अनुसार देखें लॉन्ग टर्म, तो यह 5 साल उससे ज्यादा के निवेश के लिए मान्य होता है। लॉन्ग टर्म का निवेश, ज्यादातर पर हम अपने बच्चों के पढ़ाई के लिए करते हैं, अपनी बच्ची के शादी के लिए करते हैं, या फिर अपनी रिटायरमेंट के लिए करते हैं। यह निवेश 5 साल या फिर 10 साल या फिर 50 साल जिस भी तरह की एज में हो या फिर आप जब भी अपनी रिटायरमेंट एज मानती हूं उस समय तक के लिए कर सकते हैं।  नीचे मैंने लॉन्ग टर्म में कुछ म्यूचुअल फंड के रिटर्न को दिखाएं हैं जिनको देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि लॉन्ग टर्म में कितना रिटर्न म्युचुअल फंड से निकाला जा सकता है? यह रिटर्न 5 सालों तक का है।

एसबीआई मैग्नम मल्टीकैप  म्यूच्यूअल फंड। यह म्युचुअल फंड स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी की तरफ से लांच किया गया है। इस फंड ने अपने निवेशकों को पिछले 5 सालों में 18.22% का रिटर्न निकाल कर दिया है।

 दूसरा म्युचुअल फंड मेरे ऐसेट इंडिया इक्विटी फंड । यह फंड मिरे एसेट मैनेजमेंट कंपनी की तरफ से लांच किया गया है। और इस फंड ने अपने निवेशकों को पिछले 5 सालों में 18.65% का रिटर्न निकाल कर दिया है उस टो

 तीसरा फंड है l&t इंडिया वैल्यू ग्रोथ फंड। इस फंड को l&t ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी की तरफ से लांच किया गया है। और इस फंड ने पिछले 5 सालों में 21.65% तक का रिटर्न निकाल कर दिया है।

 जैसा कि आप लोग देख सकते हैं कि म्यूचुअल फंड में  आप लोगों को किस तरह का रिटर्न मिल सकता है उस टॉप अगर आप शॉर्ट टर्म, मीडियम या फिर long-term के लिए निवेश करते हैं।

 फिक्स डिपॉजिट  रिटर्न

 फिक्स डिपाजिट का निवेश भी शॉर्ट टर्म,  मीडियम और लॉन्ग टर्म के लिए किया जा सकता है। जैसा कि मैंने आप लोगों को ऊपर फिक्स डिपॉजिट के बारे में जानकारी दी थी। उसमें मैंने बताया आप लोगों से कि फिक्स डिपॉजिट में गारंटी  रिटर्न, ब्याज के रूप में दिया जाता है। और यह ब्याज आप लोगों के समय के अनुसार अलग-अलग होता है। अगर आप लोगों ने म्यूचुअल फंड में सारे सेक्शन को पढ़ा होगा: तो आप लोगों को पता चला होगा कि शॉर्ट टर्म मीडियम टर्म और long-term क्या होता है। ठीक उसी तरह से अगर आप अपने निवेश को 1 साल 3 साल या फिर 5 साल से ज्यादा के लिए करना चाहते हैं तो उसी तरह से आप लोगों को ब्याज भी मिलेगा। जैसे कि म्यूचुअल फंड में आप लोगों को अलग-अलग रिटर्न देखने को मिल रहा था।

 नीचे मैंने आप लोगों को वीडियो के माध्यम से एसबीआई बैंक और कुछ और बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट के रिटर्न के बारे में बताया है। जिसमें 1 साल से लेकर के 5 सालों तक के उसमें ब्याज और उनसे मिलने वाले रिटोन को कैलकुलेट करके दिखाया है। तो उसको आप लोग देखिए और अंदाजा लगाइए कि कितना रिटर्न आप लोगों को मिल सकता है।

  फिक्स डिपॉजिट में अगर आप लोग short-term के लिए निवेश करते हैं तो आप लोगों को 4% से लेकर के 6% तक का ब्याज मिल सकता है। वहीं पर अगर आप लोग मीडियम टॉम के लिए निवेश करते हैं यानी कि 3 साल के लिए निवेश करते हैं। तो आप लोगों को फिक्स डिपाजिट से लगभग 5 से 7% का ब्याज मिल सकता है।  लॉन्ग टर्म के लिए अगर आप लोग शीघ्र अपोजिट में निवेश करते हैं तो आप लोग 6:30 प्रतिशत से लेकर के 10% तक का ब्याज पा सकते हैं। यह ब्याज बैंकों के ऊपर आधारित होता है कि वह आप लोगों को आप लोगों के चुने हुए समय पर कितना ब्याज दे रही है। इसलिए मैंने आप लोगों को कहा कि आप लोग कुछ बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाली ब्याज दरों को जरूर देखें जो मैंने वीडियो में दिखाएं हैं।


Risk ( Mutual Fund Vs Fixed Deposit)

 म्यूच्यूअल फंड Vs  फिक्स डिपॉजिट में निवेश करने से पहले, आप लोग यह जानिए कि इन दोनों में इसके ज्यादा जोखिम किसमें है। आप लोग इस आर्टिकल का आखरी पाठ पढ़ना मत भूलिए गा जहां पर मैंने आप लोगों को यह बताया है कि आप लोगों को किस तरह का एक्शन लेना चाहिए?

 म्यूचुअल फंड में रिस्क

 म्यूचुअल फंड में अगर आप रिस्क की बात करते हैं तो यह  निवेश रिस्की है। क्योंकि आप लोगों का निवेश शेयर बाजार में किया जाता है। जिससे कि आप लोगों के निवेश पर जोखिम बढ़ जाता है। ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि शेयर बाजार में प्रतिदिन शेयर की कीमत घटती या फिर बढ़ती रहती है। और आप लोगों का फंड मैनेजर जोकि म्यूच्यूअल फंड को मैनेज करता है। वह आप लोगों का निवेश शेयर बाजार में करता  है। अगर शेयर बाजार किसी वजह से प्रभावित होकर काफी नीचे चला जाता है। तो आप लोगों का निवेश भी प्रभावित होगा उस टॉप म्यूच्यूअल फंड में अगर आप निवेश कर रहे हैं तो आप लोगों का कैपिटल भी सुरक्षित नहीं है। कैपिटल से का मतलब है कि जो पैसा आप लोगों का मूलधन है। लेकिन म्यूच्यूअल फंड आप लोगों के लिए अलग-अलग निवेश ले करके आता है जिससे कि आप लोगों का रिस्क कम किया जा सके ।  इसलिए हर फंड के साथ फंड मैनेजर भी रखा गया है जो कि निवेशकों के निवेश की देखरेख करें।

फिक्स डिपॉजिट में रिस्क

 फिक्स डिपॉजिट में किसी भी तरह का रिस्क नहीं होता है। चाहे आप लोग बैंक में कर ले या फिर पोस्ट ऑफिस में कर ले या फिर किसी नॉन बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनी में करले। फिक्स डिपाजिट का निवेश आप लोगों के लिए सुरक्षित निवेश है और यह उन्हीं कंपनी की तरफ से दिया जाता है जो कंपनी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से अप्रूवल प्राप्त की होती है। इसलिए अगर आप लोग फिक्स डिपॉजिट में निवेश करते हैं तो आप लोगों का पैसा  100% सुरक्षित होता है।  

 लेकिन कुछ   जोखिम होता ही है हर निवेश के साथ। और यहां पर भी जोखिम है यानी कि फिक्स डिपाजिट के निवेश पर भी थोड़ा जोखिम है। अगर आप लोग कोई भी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से अप्रूव कंपनी में या फिर बैंक में निवेश करते हैं। तो उस पर केवल ₹100000 पर ही गारंटी होती है। यानी कि अगर बैंक का दिवालिया निकल जाए अगर कंपनी डिफॉल्ट हो जाए, बैंक करप्ट हो जाए तो इस अवस्था में आप लोगों का पैसा वह लौटा नहीं पाएगी। इसलिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने यह नियम बनाया है कि अगर इस अवस्था में कोई कंपनी आती है तो निवेशकों का पैसा सुरक्षित नहीं रहेगा। तो आप लोगों के निवेश पर एक इंश्योरेंस किया जाता है जो कि केवल ₹100000 तक का होता है। और यह इंश्योरेंस गवर्नमेंट की तरफ से किया जाता है अगर बैंक या फिर कोई कंपनी डिफॉल्ट कर जाती है तो सरकार आप लोगों को ₹100000 लौट आएगी इंश्योरेंस की वजह से।

Expense (Mutual Fund Vs Fixed Deposit)

 यह बहुत जरूरी है कि अगर आप लोग म्युचुअल फंड या फिर फिक्स डिपॉजिट में निवेश कर रहे हैं तो उन में लगने वाले खर्चों के बारे में भी आपको पता होना चाहिए।

  म्यूच्यूअल फंड एक्सपेंस

 म्यूचुअल फंड में एक्सपेंस का मतलब है कि मैनेजमेंट आप लोगों से कितना फीस ले रही है। यानी कि अगर आप लोग किसी म्यूचल फंड में निवेश करते हैं तो वह ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी आप लोगों से उस फंड की मैनेजमेंट फीस चार्ज करती है।  इस एक्सपेंस में म्यूच्यूअल फंड को मैनेज करने के खर्चे, सेबी को मिलने वाला कमीशन, और जिस भी ब्रोकर से आप लोगों ने म्यूचुअल फंड लिया होता है उसके खर्चे भी शामिल होते हैं। म्यूचुअल फंड में इसे एक्सपेंस रेशों के नाम से जाना जाता है। यह एक्सपेंस रेशियो पॉइंट 0% से लेकर 2% तक जाता है। और यह एक्सपेंस रेशों आप लोगों के निवेश की पूरे अमाउंट पर लिया जाता है। और यह सालाना होता है

 फिक्स डिपाजिट एक्सपेंस

 किसी भी तरह का एक्सपेंस  नहीं होता है। क्योंकि आप लोगों के पैसे यहां पर मैनेज नहीं किए जाते हैं आप लोगों की पैसों से बैंक अपना काम निकालती है। जैसे कि लोन बांटना अपने बिजनेस को और आगे तक बढ़ाना इस तरह के काम जुड़े होते हैं। तो अगर आप लोग बैंक में पैसा रख रहे हैं तो आप बैंक की मदद कर रहे हैं। इसलिए बैंक आप लोगों से किसी भी तरह का एक्सपेंस नहीं लेता है। उल्टा आप लोगों को और गारंटी लोन देता है जिससे कि आप लोग अपने पैसे को बैंक के साथ रखें। और बैंक उन पैसों को ज्यादा से ज्यादा यूज करके लोन बांट सके और अपने अन्य काम निपटा सके। बैंक के द्वारा एक्सपेंस ना लिए जाने का सबसे मीन कारण यही है।

Withdrawal (Mutual Fund Vs Fixed Deposit)

 इस सेक्शन में आप लोग समझेंगे कि म्यूचुअल फंड और  फिक्स डिपाजिट में अगर आप लोग निवेश कर रहे हैं, तो कहां से आप लोग आसानी से पैसा निकाल सकते हैं। आसानी से पैसा निकाल सकते हैं का मतलब है कि आप लोगों से पैसे निकालने पर किसी तरह के चार्ज तो नहीं लिए जा रहे हैं क्वेश्चन और कब तक आप लोगों को पैसा आप लोग के हाथ में आ जाता है?

 म्यूचुअल फंड  से निकासी

 म्यूच्यूअल फंड से निकासी अगर आप लोग करते हैं तो आप लोगों से किसी भी तरह का चार्ज नहीं लिया जाता है। अब इसका मतलब यह नहीं है कि आप लोग आराम से म्यूचल फंड से निकल सकते हैं। इसमें आपको एग्जिट लोड के रूप में चार्ज देना पड़ता है। लेकिन कुछ शर्ते हैं जिनको आप को मानना पड़ेगा। म्यूच्यूअल फंड कहता है कि अगर आप कोई भी यूनिट निकालते हैं अपने फंड से वह अगर 365 दिन से पुरानी हो जाती है तो आप लोगों को किसी भी तरह का एग्जिट लोड नहीं देना होगा। लेकिन यह सभी फंड में लागू नहीं होता है। यह किसी किसी फंड में होता है। और यह एग्जिट लोड आप लोगों को केवल उन्हीं यूनिट्स पर देने होते हैं जो 365 दिन या फिर जो भी कंपनी की तरफ से बताए गए हैं उतने दिनों के अंदर अगर आप ड्रॉ करते हैं। आइए आगे  उदाहरण के साथ समझते हैं।

 जैसे कि  मान लीजिए किसी म्यूचुअल फंड में 1% का एग्जिट लोड है, और ये 10 दिनों के लिए है। और आपने इस म्यूच्यूअल फंड की लगातार दो दिनों में सौ सौ यूनिट खरीदी हैं पहले और दूसरे दिन में। और इसे आप लोग की 11 वे दिन में निकालना चाहते हैं तो आप लोगों को कितना एग्जिट लोड देना पड़ेगा ? 

जैसा कि 1% एग्जिट लोड है  और यह 10 दिनों के लिए है। अगर आप लोगों ने 11वी दिन अपनी पूरी यूनिट्स निकाल ली यानी कि पूरे 200 यूनिट्स को निकाल लिया। तो आप लोगों को केवल 100 यूनिट पर ही एक परसेंट का एग्जिट लोड देना पड़ेगा क्योंकि आप लोगों की 100 यूनिट्स  को 10 दिन हो चुका है और बाकी के 100 यूनिट को अभी 10 दिन नहीं हुआ है। तो इस अवस्था में आप लोगों को केवल 100 यूनिट्स पर ही एक परसेंट का एग्जिट लोड देना होगा

 फिक्स डिपाजिट से निकासी

 डिपॉजिट से निकासी पर चार्ज बैंक के ऊपर आधारित होता है। जैसा कि म्यूचुअल फंड में ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी पर आधारित होता है। बैंक आप लोगों को समय पर और गारंटीड रिटर्न देती है। इसलिए वह चाहती है कि आप लोग अपना पैसा तभी निकाले जब आप लोगों का समय कंप्लीट हो जाए। जैसा कि मैंने आप लोगों को ऊपर बताया कि बैंक आप लोगों का पैसा अपने कामों के लिए यूज करती है। तो उससे अगर आप लोग पैसा मांगने जा रहे हैं तो वह आप लोगों  लोगों के फिक्स डिपॉजिट पर इंटरेस्ट कम कर देती है। आइए को एक उदाहरण से समझते हैं।

 अगर आप लोगों ने किसी बैंक में 5 सालों की फिक्स डिपोजिट करवाई है। और आप लोग 3 साल में अपने पैसे को निकालना चाहते हैं किसी जरूरत की वजह से। तो बैंक आप लोगों को जो ब्याज मिल रहा है उस पर आधा प्रतिशत से लेकर 1% तक की कटौती कर देती है। जैसे कि  बैंक फिक्स डिपॉजिट पर 7% का ब्याज दे रही है और आप लोग उसे 3 सालों में निकालना चाहते हैं तो बैंक आप लोगों को 6% ब्याज जोड़कर आपका फिक्स डिपाजिट से पैसा निकालने की अनुमति दे देगी।

Taxation (Mutual Funds Vs Fixed Deposit)

 यह बहुत जरूरी होता है कि आप लोगों के निवेश पर आप लोगों को पता हो कि किस तरह के टैक्स लगते हैं। चाहे वो टैक्स निवेश को लेकर के हो या फिर निवेश से प्राप्त पूंजी पर।

 म्यूचल फंड में टैक्स

 सभी तरह के म्यूचल फंड पर टैक्स लगता है। और यह टेक्स लोंग टर्म कैपिटल गेन और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन के नाम से जाना जाता है।  यानी कि अगर आप लोगों ने अपनी म्युचुअल फंड के निवेश से कुछ कमाया है तो उस पर आप लोगों को शॉर्ट टर्म और लांग टर्म टैक्स देना पड़ता है।

 म्यूचुअल फंड में शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन 1 सालों का होता है यानी कि अगर आप लोग म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं। और वह निवेश 1 साल से पहले निकाल लिया जाता है तो आप लोगों को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना होता है। और यह टैक्स 15% के साथ आता है। इसको समझ इस तरह से। अगर आप लोगों ने ₹100000 निवेश किया है म्यूचुअल फंड में और अब वह ₹100000, डेढ़ लाख रुपए हो चुका है, यह केवल एक उदाहरण है। तो आप लोगों को 50000 पर 15% का टैक्स देना पड़ेगा।

 म्यूचुअल फंड में लोंग टर्म कैपिटल गेन 1 साल या फिर उससे ज्यादा के निवेश पर कमाए हुए  पैसों को लोंग टर्म कैपिटल गेन माना जाता है। और यह कैपिटल गेन टैक्स 10% का होता है। अगर आप लोग म्यूचुअल फंड में ₹100000 निवेश करते हैं और आप लोगों का निवेश 1 सालों बाद डेढ़ लाख रुपए का हो गया और अब उसे आप लोग निकालना चाहते हैं। तो आप लोगों को 50000 पर लोंग टर्म कैपिटल गेन देना होगा जो कि 10% होगा। मैंने म्यूचल फंड में टैक्स को अच्छी तरीके से समझाया है इस वीडियो के माध्यम से तो आप लोग इस वीडियो को जरूर देखिएगा। अगर आप लोग म्यूचुअल फंड में किस तरह के टैक्स लिए जाते हैं उसके कैलकुलेशन के साथ।

फिक्स डिपॉजिट में टैक्स

  फिक्स्ड डिपॉजिट में  टैक्स टीडीएस के रूप में लिया जाता है। और यह टेक्स आप लोगों के फिक्स डिपॉजिट पर कमाए हुए ब्याज पर लगता है। अगर आप लोगों ने एक वित्तीय वर्ष में ₹10000 से ज्यादा का ब्याज कमाया है तो आप लोगों को 10% का टीडीएस देना पड़ता है। जैसे कि अगर आप लोगों ने किसी बैंक में ₹100000 की फिक्स डिपॉजिट करी 2019 में और उसे आप लोग 2020 में निकालते हैं और उसकी वैल्यू 111000 हो गई है। तो आप लोगों को ₹11000 पर 10% का टैक्स देना पड़ेगा।

 म्यूचुअल फंड में टैक्स फ्री इन्वेस्टमेंट

 म्यूचुअल फंड में टैक्स फ्री इन्वेस्टमेंट भी आता है जिसे इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम के नाम से जाना जाता है। इसमें  इनकम टैक्स सेक्शन 80c के तहत टैक्स छूट मिलती है। सेक्शन में डेढ़ लाख रुपए के निवेश को टैक्स फ्री कर दिया जाता है ।और म्यूचुअल फंड में इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम इसी सेक्शन पर आधारित है । यानी कि अगर आप लोग किसी इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम के म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं तो आप लोगों का निवेश डेढ़ लाख रुपए पर टैक्स फ्री होगा। यानी कि आप लोगों को उन पैसों पर सरकार को किसी तरह का टैक्स नहीं देना होगा। यह टैक्स छूट आप लोगों के सालाना इनकम पर मिलती है । बाकी जो मैंने आप लोगों को शॉर्ट टर्म और लांग टर्म कैपिटल गेन में टैक्स इसको बताए हैं वह आप लोगों को देने पड़ते हैं।

 फिक्स डिपॉजिट में टैक्स फ्री इन्वेस्टमेंट

 बैंक या फिर पोस्ट ऑफिस या फिर ऐसी कोई भी संस्था जो आप लोगों को फिक्स डिपॉजिट दे रही है। तो वह भी आप लोगों को टैक्स फ्री निवेश का विकल्प देती है। लेकिन उसके लिए कुछ सीमाएं बना करके रखना पड़ता है। और वह सीमाएं होती हैं समय अवधि यानी कि अगर आप लोग किसी फीस डिपॉजिट में निवेश कर रहे हैं तो आप लोगों को यह ध्यान रखना होगा कि वह बैंक कितने साल के फिक्स डिपॉजिट पर टैक्स छूट दे रहा है। जैसे कि अधिकतर बैंक 5 साल की फिक्स डिपॉजिट को टैक्स फ्री करते हैं 80 सी के तहत केवल डेढ़ लाख के निवेश पर। बाकी जो भी यहां से आप लोग ब्याज कमाएंगे उस पर आप लोगों को टैक्स देना पड़ता है जैसा कि मैंने आप लोगों को टीडीएस बताया।

 आप लोगों को कहां निवेश करना चाहिए?

सबसे पहले तो आप अपनी पीठ थपथपाई है। क्योंकि आप लोगों ने एक बहुत जरूरी जानकारी पड़ी है। और यह जानकारी हर निवेशक के लिए जरूरी है खास करके  जिन लोगों को निवेश के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।

 अगर आप मेरी सलाह मानेंगे तो मैं आप लोगों को न्यू चुन फंड में निवेश करने  की सलाह दूंगा। लेकिन रखिए, मेरे अपने गोल है मेरी अपनी इन्वेस्टमेंट प्लान इन है। इसलिए मैं म्यूचुअल फंड को ज्यादा  वरीयता दूंगा फिक्स डिपाजिट से। लेकिन मैं आप लोगों को कुछ चीजें समझाना चाहूंगा जिनको ध्यान में रख कर के आप लोग इन दोनों निवेश में से अपने लिए बेस्ट ऑप्शन को चुनिए।

 अगर आप  लोग लॉन्ग टर्म गोल के साथ आ रहे हैं तो आप लोगों को म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहिए। जैसे कि अगर आप लोग 5 साल या फिर उससे ज्यादा का निवेश करना चाहते हैं और अपने पैसे पर ज्यादा रिटर्न कमाना चाहते हैं। आप लोगों को म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहिए।

 लेकिन आप लोग म्युचुअल फंड  के निवेश पर जोखिम को समझिए। अगर आप लोग 5 साल या फिर उससे ज्यादा की गोल के साथ आ रहे हैं तो आप लोग लार्ज कैप म्युचुअल फंड में निवेश कीजिए। लार्ज कैप के म्यूच्यूअल फंड आप लोगों का पैसा लेकर के लाज क्या कि कंपनीज में निवेश करते हैं। जिन से प्रॉफिट की उम्मीद लगाई जा सकती है। या कंपनीज ऑलरेडी मार्केट में काफी अच्छा प्रदर्शन कर रही होती है। और यह लगातार अच्छे प्रदर्शन के साथ आगे बढ़ती रहती हैं। इसलिए अगर आप लोग long-term गोल्स के साथ आ रहे हैं तो आप लोगों को म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहिए।

 लेकिन अगर आप लोग अपने पैसे पर जरा सा भी रिस्क नहीं लेना चाहते हैं और आप लोग पांच से 7% या फिर 8% तक की ब्याज पर खुश है और आप लोगों को संतुष्टि मिलती है तो आप लोगों को फिक्स डिपॉजिट में निवेश करना चाहिए। 

अगर आप लोगों ने अभी तक म्यूच्यूअल फंड या फिर फिक्स डिपॉजिट। कहीं पर भी निवेश नहीं किया है तो आप लोगों को अपना निवेश सबसे पहले सुरक्षित जगह पर करना चाहिए। आप लोग फिक्स डिपाजिट से शुरू कर सकते हैं। और फिर अपना निवेश म्यूचल फंड में करें।

 अगर आप लोगों का किसी भी तरह का प्रश्न हो तो आप लोग मुझे नीचे कमेंट करके पूछ सकते हैं।  मैं आप लोगों के सारे क्वेश्चंस को सुनकर उनको सॉल्व करने की पूरी कोशिश करूंगा। आप इस आर्टिकल को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक शेयर करें खास करके उन लोगों के साथ जो लोग बिल्कुल नए हैं इन्वेस्टमेंट के क्षेत्र में।

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Ravi Kant
Hi... this is Ravi the man behind 'The Indian Fever' I am a full-time Youtuber as well as the blogger. I am providing here the perspective and analysis of knowledge and news by my own analysis.

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